आज के तेज़ रफ्तार जीवन में तनाव, चिंता और मानसिक थकान आम बात हो गई है। ऐसे में बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि बियर, शराब या किसी भी प्रकार का अल्कोहोल पीने से दिमाग रिलैक्स हो जाता है।
लेकिन सवाल यह है, क्या यह रिलैक्सेशन वास्तविक है या केवल दिमाग को दिया गया एक अस्थायी भ्रम?
इस लेख में हम इस सवाल का जवाब विज्ञान, मनोविज्ञान, आयुर्वेद और व्यवहारिक अनुभवों के आधार पर विस्तार से समझेंगे।
अल्कोहोल (Ethanol) एक सायकोएक्टिव पदार्थ है, यानी यह सीधे हमारे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) पर असर डालता है।
जब हम बियर या शराब पीते हैं, तो
यह खून में घुल जाता है।
दिमाग तक पहुँचता है।
और न्यूरॉन्स के बीच संदेशों की गति को धीमा कर देता है।
दिमाग में एक केमिकल होता है - GABA (Gamma Aminobutyric Acid)
अल्कोहोल इस GABA को बढ़ा देता है, जिससे:
सोचने की गति धीमी होती है।
डर और झिझक कम लगती है।
व्यक्ति खुद को हल्का महसूस करता है।
यही वो पल है जिसे लोग “रिलैक्स होना” समझ लेते हैं।
असल में:
दिमाग शांत नहीं हो रहा
बल्कि उसकी नैचुरल कंट्रोल सिस्टम दब रही है।
इसे ऐसे समझिए:
जैसे किसी मशीन की आवाज़ बंद करने के लिए उसका स्विच तोड़ दिया जाए -
आवाज़ बंद होगी, लेकिन मशीन खराब हो जाएगी।
अगर कोई व्यक्ति पहले से मानता है कि:
“बियर पीने से मुझे सुकून मिलेगा”
तो दिमाग उसी दिशा में प्रतिक्रिया देता है।
इसे ही Placebo Effect कहा जाता है।
अल्कोहोल:
शुरुआत में नींद जल्दी लाता है।
लेकिन Deep Sleep (REM Sleep) को खराब करता है।
परिणाम:
सुबह थकान
चिड़चिड़ापन
दिमाग भारी
लगातार सेवन से:
याददाश्त कमज़ोर होती है।
निर्णय लेने की क्षमता घटती है।
चिंता और डिप्रेशन बढ़ता है।
धीरे-धीरे:
बिना अल्कोहोल दिमाग शांत नहीं लगता
तनाव बढ़ने लगता है।
यही मानसिक निर्भरता (Psychological Dependence) है।
आयुर्वेद में “मद्य” का वर्णन है, लेकिन:
सीमित
औषधीय
योग्य व्यक्ति द्वारा
आज का शराब सेवन:
मात्रा से अधिक
मनोवैज्ञानिक कारणों से
और आनंद के भ्रम में
आयुर्वेद के अनुसार यह राजसिक और तामसिक प्रवृत्ति बढ़ाता है।
जलन
गुस्सा
अनिद्रा
चिंता
घबराहट
डर
आलस्य
मोटापा
मानसिक जड़ता
अनुलोम-विलोम
भ्रामरी
ध्यान
अश्वगंधा
ब्राह्मी
शंखपुष्पी
कभी-कभी मात्रा कम हो तो तुरंत नुकसान नहीं, लेकिन रिलैक्सेशन का भ्रम जरूर बनता है।
नहीं, वह तनाव को दबा देती है, खत्म नहीं करती।
हाँ, और वह शांति स्थायी होती है।
बियर या कोई भी अल्कोहोलिक पदार्थ दिमाग को रिलैक्स नहीं करता,
वह केवल:
भावनाओं को दबाता है।
चेतना को सुस्त करता है।
और एक अस्थायी भ्रम देता है।
भीतर से आता है।
जागरूकता से आता है।
और खुद से जुड़ने से आता है।
अगर आप सच में अपने दिमाग को शांत करना चाहते हैं,
तो उसे सुन्न नहीं - समझिए।
आप अकेले नहीं हैं।
तनाव हर किसी को होता है।
लेकिन समाधान बोतल में नहीं, अंदर की समझ में है।