गीता के अनुसार मनुष्य के तीन गुण सत्व, रज और तम क्या हैं?

जनरल बातें
Feb 22, 2026
loding

प्रस्तावना:

मनुष्य का स्वभाव, सोच, व्यवहार और जीवन की दिशा केवल बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके अंदर मौजूद प्रकृति के तीन मूल गुणों से संचालित होती है। हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि प्रत्येक मनुष्य में तीन प्रकार की प्रवृत्तियाँ कार्य करती हैं - सत्व (शुद्धता और संतुलन), रज (क्रियाशीलता और इच्छाएँ) और तम (जड़ता और अज्ञान)।

यह तीनों गुण हर व्यक्ति में होते हैं, लेकिन उनका अनुपात अलग-अलग होता है। यही अनुपात तय करता है कि व्यक्ति शांत रहेगा या अशांत, कर्मयोगी बनेगा या आलसी, ज्ञान की ओर बढ़ेगा या भ्रम में रहेगा।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे:

  • तीनों गुण क्या हैं?

  • इनका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

  • कौन सा गुण श्रेष्ठ है?

  • और कैसे हम अपने जीवन में सत्व गुण को बढ़ा सकते हैं?


तीन गुणों की मूल अवधारणा क्या है?

प्रकृति तीन मूल शक्तियों से बनी है:

  1. सत्व - प्रकाश, शुद्धता और संतुलन

  2. रज - गति, इच्छा और कर्म

  3. तम - अंधकार, जड़ता और अज्ञान

मनुष्य का मन, बुद्धि, आहार, व्यवहार, विचार और जीवनशैली - सब इन तीनों गुणों के प्रभाव में रहते हैं। कोई भी व्यक्ति पूरी तरह एक गुण वाला नहीं होता, बल्कि यह गुण समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं।


सत्व गुण क्या है?

सत्व गुण शुद्धता और संतुलन का गुण है। मतलब के जब मनुष्य के अंदर सत्व गुण बढ़ता है तब अच्छे विचार, कम बोलना, किसीका अहित ना सोचना और करना, किसी को दुःख अथवा दर्द होने पर उसे इलाज या मदद करना इसी प्रकार के सवभाव को सत्व गुण कहते है।

सत्व गुण की विशेषताएँ:

सत्व का अर्थ है प्रकाश, पवित्रता और संतुलन। जिस व्यक्ति में सत्व गुण अधिक होता है, उसके अंदर निम्न गुण दिखाई देते हैं:

  • मन की शांति और स्थिरता

  • सत्य बोलने की आदत

  • करुणा और दया

  • संयम और संतुलित जीवन

  • आध्यात्मिकता और आत्मचिंतन

  • सकारात्मक सोच

ऐसा व्यक्ति दूसरों के हित के बारे में सोचता है और अपने जीवन को अनुशासित तरीके से जीता है।

सत्व गुण वाले व्यक्ति का जीवन:

  • जल्दी उठना

  • सात्विक भोजन करना

  • ध्यान, योग या प्रार्थना करना

  • क्रोध पर नियंत्रण

  • सरल और संतोषपूर्ण जीवन

सत्व गुण मनुष्य को ज्ञान, शांति और आत्मविकास की ओर ले जाता है।


रज गुण क्या है?

रजो गुन क्रियाशीलता और इच्छाओं का गुण मन जाता है. क्योंकि यह गुण इंसान को किसी काम को करना है तो उसमे अंदर अपना स्वार्थ खोजता है की अगर में ये काम करता हूँ तो मुझे ये-ये चीज मिलनी चाइए। अगर में इसकी मदद करता हूँ तो मुझे क्या फायदा - मुझे क्या मिलेगा? इस तरह के गुण वाली व्यक्ति को रजो गुण कहते है. इसमें दया-रहेम की भावना तो होती है लेकिन बहुत कम। 

रज गुण की विशेषताएँ:

रज का अर्थ है गति और सक्रियता। यह गुण व्यक्ति को कर्म करने की प्रेरणा देता है, लेकिन इसके साथ इच्छाएँ और आसक्ति भी बढ़ती हैं।

रज गुण वाले व्यक्ति में यह प्रवृत्तियाँ देखी जाती हैं:

  • अधिक इच्छाएँ और महत्वाकांक्षा

  • सफलता और प्रतिष्ठा की चाह

  • लगातार व्यस्त रहना

  • प्रतिस्पर्धा की भावना

  • बेचैनी और तनाव

रज गुण का प्रभाव:

रज गुण जीवन में प्रगति तो देता है, लेकिन यदि संतुलन न हो तो:

  • मानसिक तनाव बढ़ता है

  • संतोष कम हो जाता है

  • व्यक्ति हमेशा कुछ पाने की दौड़ में रहता है

इसलिए रज गुण आवश्यक तो है, लेकिन इसे सत्व के नियंत्रण में रखना जरूरी होता है।


तम गुण क्या है?

तमो गुण अज्ञान और जड़ता का गुण है, यह एक प्रकार का राजसी गुण बताया गया है. सच कहूं तो इस गुण से हर व्यक्ति को बच कर रहना चाहिए। क्योंकि यह गुण हमें विनाश की और ले जाता है। यह गुण वाले व्यक्ति किसी के दर्द होने पर या तकलीफ होने पर वह खुश होता है, किसी को चोंट लगने पर मदद करने के वजाय हस्ता है. किसी को तकलीफ देने के बारे में नए नए षड़यंत्र करता रहता है. इसलिए यह गुण हमारे भीतर नहीं आने देना चाहिए। 

तम गुण की विशेषताएँ:

तम का अर्थ है अंधकार, आलस्य और भ्रम। जब तम गुण बढ़ता है, तब व्यक्ति में निम्न प्रवृत्तियाँ आती हैं:

  • आलस्य और काम में रुचि न होना

  • अधिक सोना

  • नकारात्मक सोच

  • क्रोध, हिंसा या उदासीनता

  • गलत निर्णय लेना

तम गुण का जीवन पर प्रभाव:

तम गुण व्यक्ति को:

  • अज्ञान में रखता है

  • आत्मविकास से दूर करता है

  • जीवन में ठहराव और निराशा लाता है

तम गुण को कम करना आध्यात्मिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक है।


क्या तीनों गुण जरूरी हैं?

हाँ, तीनों गुण आवश्यक हैं।

  • सत्व दिशा देता है

  • रज कर्म करवाता है

  • तम शरीर को आराम देता है

समस्या तब होती है जब रज और तम अधिक हो जाते हैं और सत्व कम हो जाता है।


सत्व गुण कैसे बढ़ाएँ?

आहार से:

  • ताजा और हल्का भोजन

  • फल, सब्जियाँ, दूध

  • कम मसाले और तला भोजन

दिनचर्या से:

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठना

  • नियमित योग और ध्यान

  • समय पर सोना

मानसिक अभ्यास:

  • सकारात्मक सोच

  • कृतज्ञता का भाव

  • अच्छे साहित्य और आध्यात्मिक ग्रंथ पढ़ना


तीनों गुण और आधुनिक विज्ञान:

आधुनिक मनोविज्ञान के अनुसार:

  • सत्व = मानसिक संतुलन और भावनात्मक स्थिरता

  • रज = उच्च उत्तेजना और लक्ष्य-उन्मुख व्यवहार

  • तम = अवसाद, आलस्य और मानसिक निष्क्रियता

इस प्रकार प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान दोनों एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं।


जीवन में गुण कैसे बदलते हैं?

गुण स्थायी नहीं होते। यह बदलते रहते हैं:

  • भोजन से

  • संगति से

  • विचारों से

  • दिनचर्या से

  • वातावरण से

अच्छी संगति और सकारात्मक जीवनशैली से सत्व बढ़ता है।


निष्कर्ष:

मनुष्य का जीवन इन तीन गुणों के बीच संतुलन की यात्रा है। जब सत्व बढ़ता है, तब मन शांत होता है, निर्णय स्पष्ट होते हैं और जीवन में संतोष आता है। रज हमें कर्म करने की शक्ति देता है और तम हमें विश्राम देता है, लेकिन यदि इनका संतुलन बिगड़ जाए तो जीवन अशांत हो सकता है।

इसलिए हमें अपने जीवन में धीरे-धीरे सत्व गुण को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए - अच्छे विचारों से, सात्विक आहार से, सकारात्मक संगति से और आत्मचिंतन से।

प्रिय पाठक, यदि हम अपने अंदर के गुणों को पहचान लें और उन्हें सही दिशा में ले जाएँ, तो जीवन केवल सफल ही नहीं बल्कि शांत, संतुलित और सार्थक भी बन सकता है। यही इस ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य है - बाहरी सफलता के साथ आंतरिक शांति।


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