भारत की धरती पर
उत्पन्न आयुर्वेद केवल चिकित्सा-पद्धति नहीं बल्कि एक
जीवन-दर्शन है।
वहीं आधुनिक विज्ञान (Modern
Science) अनुभव,
परीक्षण और प्रयोग पर आधारित एक तर्कसंगत
प्रणाली है।
दोनों का उद्देश्य एक ही है, मानव जीवन को स्वस्थ, संतुलित और दीर्घायु बनाना।
परंतु उनके दृष्टिकोण,
कार्यविधि और मूल दर्शन में अनेक
भिन्नताएँ भी हैं।
इस लेख में हम
जानेंगे
“आयुर्वेद” शब्द संस्कृत भाषा के दो शब्दों है -
‘आयुस्’
(जीवन) और ‘वेद’ (ज्ञान)।
अर्थात् - “जीवन का ज्ञान”।
यह केवल रोगों
का उपचार नहीं बल्कि स्वस्थ रहने की कला
सिखाता है।
आयुर्वेद पाँच
महाभूतों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश पर आधारित है। इनसे ही त्रिदोष वात,
पित्त,
कफ बनते हैं,
जो शरीर की क्रियाओं का नियंत्रण करते
हैं। यदि ये संतुलित रहें तो शरीर स्वस्थ रहता है, और असंतुलन रोग का कारण बनता है।
आधुनिक विज्ञान
का आधार है, प्रयोग (Experimentation),
परीक्षण (Observation)
और
सत्यापन (Verification)।
यह हर सिद्धांत को प्रयोगशाला में परखता
है, और प्रमाण आधारित
चिकित्सा (Evidence-based Medicine)
को मान्यता देता है।
इस प्रकार यह
शरीर के भौतिक पक्ष पर केंद्रित प्रणाली है।
दोनों पद्धतियों
का लक्ष्य एक ही है,
स्वास्थ्य की
रक्षा और रोगों का निवारण।
नीचे दोनों के बीच कुछ महत्वपूर्ण
समानताएँ दी गई हैं:
आयुर्वेद में “धातु, अग्नि, स्रोतो” का वर्णन मिलता है,
जबकि आधुनिक विज्ञान “टिशू, मेटाबॉलिज़्म,
और सर्क्युलेशन”
की बात करता है।
दोनों शरीर को एक
संगठित यंत्र मानते हैं।
आयुर्वेद कहता
है -
“आहार ही औषधि है।”
आधुनिक विज्ञान भी “Diet
and Lifestyle Diseases” की चर्चा करता
है।
दोनों मानते हैं कि
संतुलित आहार और
दिनचर्या स्वास्थ्य की कुंजी है।
आयुर्वेद की “दिनचर्या” और “ऋतुचर्या” निवारक स्वास्थ्य का मूल है।
आधुनिक विज्ञान भी “Preventive
Care” और “Vaccination”
के रूप में यही सिद्धांत अपनाता है।
दोनों मानते हैं
कि मन और शरीर का
सीधा संबंध है।
जहाँ आयुर्वेद “सत्व, रज, तम” के असंतुलन से मानसिक रोग बताता है,
वहीं आधुनिक विज्ञान “Psychosomatic
Disorders” को मान्यता देता
है।
आयुर्वेद
सम्पूर्ण शरीर को एक इकाई मानता है, जबकि आधुनिक चिकित्सा शरीर को अंगों में विभाजित कर देखती
है।
आयुर्वेद अनुभव
और परंपरा पर आधारित है।
आधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला आधारित
साक्ष्यों पर।
हालांकि आज दोनों के बीच यह अंतर तेजी से
घट रहा है, अनेक आयुर्वेदिक दवाओं का वैज्ञानिक परीक्षण होने लगा है।
आज विश्व में “Integrative
Medicine” की अवधारणा तेजी
से बढ़ रही है।
जहाँ आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा का
संतुलित प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण
यह दृष्टिकोण
स्वास्थ्य को केवल रोग-मुक्ति नहीं बल्कि सम्पूर्ण संतुलन के रूप में
देखता है।
आयुर्वेद और
आधुनिक विज्ञान दोनों की जड़ें अलग हैं, परंतु उनका लक्ष्य एक ही है।
“स्वस्थ शरीर,
शांत मन,
और जागृत आत्मा”।
इन दोनों का संगम ही भविष्य की चिकित्सा है।
जहाँ प्राचीन ज्ञान आधुनिक प्रयोगशालाओं से मिलकर मानवता
को सम्पूर्ण स्वास्थ्य का मार्ग दिखाएगा।