नीम वृक्ष की उत्पत्ति कथा और उसके औषधीय चमत्कार

आयुर्वेद
Jan 07, 2026
loding

प्रस्तावना:

नीम वृक्ष भारतीय संस्कृति, आयुर्वेद और लोकजीवन का एक ऐसा अमूल्य उपहार है, जिसे केवल एक पेड़ कहना उसके महत्व को कम कर देना होगा। यह वृक्ष औषधि, धर्म, विज्ञान और पर्यावरणचारों का संगम है।


नीम वृक्ष का परिचय (Botanical & Cultural Identity):

नीम का वैज्ञानिक नाम Azadirachta indica है।
संस्कृत में इसे निम्ब, अरिष्ट, पिचुमर्द कहा गया है।

नीम के नामों का अर्थ:

  • अरिष्टरोगों को नष्ट करने वाला
  • पिचुमर्दकीटाणुओं का संहारक
  • निम्बकड़वा, पर अमृत समान

नीम वृक्ष की पौराणिक उत्पत्ति कथा:

समुद्र मंथन और नीम की उत्पत्ति:

पुराणों के अनुसार जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तब अमृत कलश निकला। उस अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर गिरीं।
जिन स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरीं, वहाँ नीम वृक्ष उत्पन्न हुआ

इसलिए नीम को अमृतवृक्षभी कहा गया।

देवी शीतला और नीम:

लोकमान्यता के अनुसार देवी शीतला नीम पर निवास करती हैं।
नीम की ठंडी और रोगनाशक प्रकृति चेचक, फोड़े-फुंसी जैसे रोगों से रक्षा करती है।


शास्त्रों में नीम का उल्लेख:

अथर्ववेद में नीम:

अथर्ववेद में नीम को रक्षात्मक और रोगनाशक औषधि कहा गया है।

चरक संहिता में नीम:

चरक संहिता के अनुसार:

नीम कफ-पित्त को शमन करता है और रक्त को शुद्ध करता है।


आयुर्वेद में नीम के औषधीय चमत्कार:

त्रिदोष पर प्रभाव:

  • कफ: नाशक
  • पित्त: संतुलक
  • वात: नियंत्रक

नीम के विभिन्न भागों के लाभ:

नीम की पत्तियाँ

  • रक्त शुद्धिकरण
  • त्वचा रोगों में लाभ
  • प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाती हैं

नीम की छाल

  • मधुमेह नियंत्रण
  • बुखार नाशक

नीम का तेल

  • जीवाणुनाशक
  • बालों व त्वचा के लिए लाभकारी

नीम और आधुनिक विज्ञान:

वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं?

आधुनिक शोध के अनुसार नीम में 

  • Anti-bacterial
  • Anti-viral
  • Anti-fungal गुण पाए जाते हैं।

नीम से बनी दवाएँ आज

  • टूथपेस्ट
  • साबुन
  • स्किन क्रीम में उपयोग हो रही हैं।

नीम का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व:

पूजा में नीम:

  • घर के द्वार पर नीम की पत्तियाँ लगाना
  • नववर्ष पर नीम-गुड़ सेवन करना

यह हम सभी के शरीर, मन और आत्मा तीनो की शुद्धि का प्रतीक है।


नीम और पर्यावरण संरक्षण:

नीम-

  • वायु शुद्ध करता है
  • कीटों को दूर रखता है
  • जैव विविधता को बढ़ावा देता है

निष्कर्ष:

नीम केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का जीवित प्रमाण है।
पौराणिक अमृत से लेकर आधुनिक विज्ञान तक  नीम हर युग में उपयोगी सिद्ध हुआ है।


महत्वपूर्ण सूचना:

यह लेख आयुर्वेदिक ग्रंथों, पौराणिक स्रोतों तथा विभिन्न शोधपरक माध्यमों पर आधारित केवल सामान्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है।

यहां दी गई जानकारी को किसी भी प्रकार का चिकित्सकीय परामर्श या उपचार न समझें।

यदि आपको किसी प्रकार की बीमारी, स्वास्थ्य समस्या या उपचार की आवश्यकता हो, तो कृपया योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही कोई भी उपाय अपनाएं

इस लेख का उद्देश्य केवल ज्ञानवर्धन और जागरूकता बढ़ाना है।


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