आज का मनुष्य देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और काम में उलझा रहता है। देर से सोना अब “नॉर्मल” बन चुका है, लेकिन शरीर के लिए यह बिल्कुल सामान्य नहीं है। बहुत से लोग शिकायत करते हैं कि,
इन सभी समस्याओं की जड़ में एक बड़ा कारण है - रात को जागना।
आइए गहराई से समझते हैं कि रात को जागने से खाना क्यों नहीं पचता, इसके पीछे आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक कारण क्या हैं।
आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में जो भी भोजन पचता है, उसका आधार है जठराग्नि।
अग्नि केवल पेट की आग नहीं है, बल्कि यह एक जैविक शक्ति है जो:
यदि अग्नि ठीक है तो स्वास्थ्य ठीक, यदि अग्नि मंद है तो रोग निश्चित
आयुर्वेद में 24 घंटे को दोषों के अनुसार बांटा गया है:
रात 10 से 2 बजे के बीच शरीर का पित्त पाचन नहीं, बल्कि
यदि आप इस समय जाग रहे हैं, तो यह पित्त गलत दिशा में लग जाता है।
जैसे की:
इसका सीधा असर अग्नि पर पड़ता है।
हमारा शरीर सूरज के अनुसार चलता है।
जब हम देर रात तक जागते हैं, तब
उसका नतीजा खाना पेट में पड़ा रह जाता है।
आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि शरीर की एक सर्कैडियन रिदम होती है, जो:
रात को जागने से यह रिदम टूट जाती है और:
जब आप रात को 10–11 बजे खाना खाते हैं और फिर जागते रहते हैं:
आम (Ama) यानी आयुर्वेद में इसका मतलब सभी रोगों की जड़
आम वह स्थिति है जब:
इसके लक्षण:
और इसका बड़ा कारण है, रात को जागना
रात 10 से 2 बजे लीवर:
जागने से यह प्रक्रिया बाधित होती है, जैसे कि
देर रात तक जागने से:
तनाव पाचन का सबसे बड़ा दुश्मन
रात को जागने से:
इससे:
रात 9:30-10 बजे तक सो जाएँ
सूर्यास्त के 2-3 घंटे पहले भोजन
अग्नि को तेज करता है।
सोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन बंद
रोज़ एक समय सोना-जागना
हाँ, क्योंकि शरीर के लिए जागना ही मुख्य कारण है, काम नहीं।
नहीं, दिन की नींद रात की नींद का विकल्प नहीं है।
रात को जागना केवल नींद की समस्या नहीं है, यह पूरे पाचन तंत्र पर आघात है।
आयुर्वेद हजारों साल पहले ही कह चुका है कि
“जब सूर्य अस्त होता है, तब शरीर को विश्राम करने की जरुरत बढ़ जाती है।”
यदि हम प्रकृति की इस लय को तोड़ते हैं, तो उसका मूल्य हमें
यह लेख आपको डराने के लिए नहीं, बल्कि जगाने के लिए लिखा गया है।
आपका शरीर आपका सबसे बड़ा मित्र है। बस उसे समय पर आराम दीजिए।
आज से थोड़ा जल्दी सोना शुरू करें, यकीन मानिए आपका पेट, मन और जीवन तीनों आपको धन्यवाद देंगे।