किस बर्तन में खाना पकाना और स्टोर करना सेहत के लिए सबसे अच्छा है?

आयुर्वेद
Feb 02, 2026
loding

प्रस्तावना: भोजन से पहले बर्तन क्यों महत्वपूर्ण है?

हम आमतौर पर यह सोचते हैं कि क्या खाया जाए, लेकिन यह कम ही सोचते हैं कि किस बर्तन में पकाया गया भोजन हमारे शरीर में किस रूप में जाता है।
वेदों और आयुर्वेद में कहा गया है कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि यह ऊर्जा, चेतना और स्वास्थ्य का स्रोत है।

  • जैसे बीज की गुणवत्ता से फसल तय होती है,
  • वैसे ही बर्तन की प्रकृति भोजन की गुणवत्ता तय करती है।

प्राचीन भारत में रसोई को यज्ञशाला जैसा पवित्र माना जाता था और बर्तनों का चयन भी धातु के गुण (गुण-धर्म) देखकर किया जाता था।


आयुर्वेद और वेदों में धातुओं का महत्व:

आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर पंचमहाभूत से बना है:

  • पृथ्वी

  • जल

  • अग्नि

  • वायु

  • आकाश

हर धातु में इन तत्वों का अलग-अलग संतुलन होता है।

इसी कारण हर धातु का भोजन पर और फिर शरीर पर अलग प्रभाव पड़ता है।

वेदों में धातुओं को “रसवर्धक” और “ऊर्जावर्धक” माना गया है, बशर्ते उनका सही उपयोग हो।


विभिन्न धातुओं के बर्तन: विस्तृत विश्लेषण:

अब हम एक-एक करके सभी प्रमुख धातुओं को समझते हैं -

  1. पकाने के लिए
  2. स्टोर करने के लिए
  3. स्वास्थ्य प्रभाव
  4. आयुर्वेदिक दृष्टि

मिट्टी (Clay / Earthenware):

वेदों में स्थान:

ऋग्वेद और अथर्ववेद में मिट्टी को माता पृथ्वी का स्वरूप कहा गया है।

गुण:

  • क्षारीय (Alkaline)

  • प्राकृतिक ताप नियंत्रण

  • सूक्ष्म खनिज युक्त

स्वास्थ्य लाभ:

  • भोजन का पोषण तत्व सुरक्षित रहता है

  • एसिडिटी, गैस, कब्ज में लाभ

  • स्वाद और सुगंध बढ़ती है

क्या पकाएँ?

  • दाल

  • सब्ज़ी

  • चावल

  • खिचड़ी

स्टोर करना?

लंबे समय तक स्टोर नहीं
अल्पकालिक ठंडा भोजन

सावधानी:

  • ग्लेज़ या केमिकल कोटिंग वाली मिट्टी न लें


तांबा (Copper):

आयुर्वेदिक महत्व:

तांबा त्रिदोष संतुलक माना गया है।

गुण:

  • जीवाणुनाशक

  • अग्नि तत्व प्रधान

स्वास्थ्य लाभ:

  • इम्युनिटी बढ़ाता है

  • पाचन शक्ति मजबूत

  • पानी शुद्ध करता है

क्या पकाएँ?

सीधा खाना पकाना नहीं

स्टोर करने के लिए?

पानी के लिए सही 

खट्टा, नमकीन भोजन बिलकुल स्टोर नहीं करना चाहिए।

वेदों के अनुसार:

तांबे का जल प्राणशक्ति बढ़ाता है


पीतल (Brass):

धातु संयोजन:

इस धातु में तांबा और जस्ता मिला हुआ होता है।

गुण:

  • पाचन अग्नि को उत्तेजित करता है

  • भारी लेकिन स्थिर

स्वास्थ्य लाभ:

  • भूख बढ़ाता है

  • कफ दोष कम करता है

क्या पकाएँ?

सब्ज़ी
रोटी सेकना
खट्टे पदार्थ ना पकाए 

स्टोर?

पका हुआ भोजन रख सकते है लेकिन तीन घंटे तक ज्यादा नहीं


कांसा (Bell Metal / Bronze):

आयुर्वेद में श्रेष्ठ:

कांसा को सबसे संतुलित धातु माना गया है।

गुण:

  • वात दोष शांत करता है

  • स्वाद बढ़ाता है

स्वास्थ्य लाभ:

  • थायरॉइड में सहायक

  • मानसिक शांति

क्या पकाएँ?

  • दाल
  • चावल
  • सब्ज़ी

स्टोर?

तीन घंटे तक ज्यादा नहीं


लोहा (Iron):

वेदों में स्थान:

लोहे की धातु से शक्ति मिलती है और रक्त संचार सही रहता है।

गुण:

  • रक्तवर्धक

  • अग्नि तत्व प्रबल

स्वास्थ्य लाभ:

  • एनीमिया में लाभ

  • कमजोरी दूर करता है

क्या पकाएँ?

  • पालक
  • मेथी
  • दाल

स्टोर?

नहीं करना चाहिए


स्टील (Stainless Steel):

आधुनिक धातु:

वेदों में उल्लेख नहीं

गुण:

  • निष्क्रिय

  • पोषण नहीं देता

लाभ:

  • सुरक्षित

  • टिकाऊ

नुकसान:

  • ऊर्जा रहित भोजन

उपयोग:

  • स्टोरिंग
  • उबालना

एल्युमिनियम:

स्वास्थ्य दृष्टि

आयुर्वेद निषेध

नुकसान:

  • न्यूरोलॉजिकल प्रभाव

  • हड्डियाँ कमजोर

सूचना:

खाना पकाने से बचें


नॉन-स्टिक / टेफ्लॉन:

आधुनिक खतरा:

  • उच्च ताप पर विषाक्त गैस

स्वास्थ्य प्रभाव:

  • हार्मोन असंतुलन

  • कैंसर जोखिम

आयुर्वेदिक दृष्टि:

पूर्ण निषेध


किस बर्तन में भोजन स्टोर करना श्रेष्ठ है?

  • पानी तांबे की धातु में 
  • दाल कांच अथवा स्टील की धातु में 
  • चावल मिट्टी की धातु में 
  • दही मिट्टी अथवा कांच धातु में 
  • घी कांच अथवा पीतल की धातु में


वेदों के अनुसार भोजन, बर्तन, मन:

वेद कहते हैं:

“यदन्नं तद् मनः” अर्थात
जैसा अन्न, वैसा मन।

गलत बर्तन:

  • मानसिक चिड़चिड़ापन
  • आलस्य
  • रोग

आधुनिक विज्ञान क्या कहता है?

आज का विज्ञान भी मानता है कि:

  • धातुएँ भोजन में सूक्ष्म मात्रा में घुलती हैं

  • वही सूक्ष्म तत्व शरीर को प्रभावित करते हैं


निष्कर्ष (Conclusion):

आज हमने जाना कि:

  • हर बर्तन केवल वस्तु नहीं, ऊर्जा है

  • वेद और आयुर्वेद का ज्ञान आज भी वैज्ञानिक है

  • सही बर्तन = कम दवा, बेहतर स्वास्थ्य

अगर हम थोड़ा-सा भी प्राचीन ज्ञान को अपनाएँ,
तो रसोई ही हमारा पहला अस्पताल बन सकती है।

मैं आपसे बस इतना कहूँगा -
आज एक बर्तन बदलिए, कल शरीर धन्यवाद देगा।


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