हम आमतौर पर यह सोचते हैं कि क्या खाया जाए, लेकिन यह कम ही सोचते हैं कि किस बर्तन में पकाया गया भोजन हमारे शरीर में किस रूप में जाता है।
वेदों और आयुर्वेद में कहा गया है कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि यह ऊर्जा, चेतना और स्वास्थ्य का स्रोत है।
प्राचीन भारत में रसोई को यज्ञशाला जैसा पवित्र माना जाता था और बर्तनों का चयन भी धातु के गुण (गुण-धर्म) देखकर किया जाता था।
आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर पंचमहाभूत से बना है:
पृथ्वी
जल
अग्नि
वायु
आकाश
हर धातु में इन तत्वों का अलग-अलग संतुलन होता है।
इसी कारण हर धातु का भोजन पर और फिर शरीर पर अलग प्रभाव पड़ता है।
वेदों में धातुओं को “रसवर्धक” और “ऊर्जावर्धक” माना गया है, बशर्ते उनका सही उपयोग हो।
अब हम एक-एक करके सभी प्रमुख धातुओं को समझते हैं -
ऋग्वेद और अथर्ववेद में मिट्टी को माता पृथ्वी का स्वरूप कहा गया है।
क्षारीय (Alkaline)
प्राकृतिक ताप नियंत्रण
सूक्ष्म खनिज युक्त
भोजन का पोषण तत्व सुरक्षित रहता है
एसिडिटी, गैस, कब्ज में लाभ
स्वाद और सुगंध बढ़ती है
दाल
सब्ज़ी
चावल
खिचड़ी
लंबे समय तक स्टोर नहीं
अल्पकालिक ठंडा भोजन
ग्लेज़ या केमिकल कोटिंग वाली मिट्टी न लें
तांबा त्रिदोष संतुलक माना गया है।
जीवाणुनाशक
अग्नि तत्व प्रधान
इम्युनिटी बढ़ाता है
पाचन शक्ति मजबूत
पानी शुद्ध करता है
सीधा खाना पकाना नहीं
पानी के लिए सही
खट्टा, नमकीन भोजन बिलकुल स्टोर नहीं करना चाहिए।
तांबे का जल प्राणशक्ति बढ़ाता है
इस धातु में तांबा और जस्ता मिला हुआ होता है।
पाचन अग्नि को उत्तेजित करता है
भारी लेकिन स्थिर
भूख बढ़ाता है
कफ दोष कम करता है
सब्ज़ी
रोटी सेकना
खट्टे पदार्थ ना पकाए
पका हुआ भोजन रख सकते है लेकिन तीन घंटे तक ज्यादा नहीं
कांसा को सबसे संतुलित धातु माना गया है।
वात दोष शांत करता है
स्वाद बढ़ाता है
थायरॉइड में सहायक
मानसिक शांति
तीन घंटे तक ज्यादा नहीं
लोहे की धातु से शक्ति मिलती है और रक्त संचार सही रहता है।
रक्तवर्धक
अग्नि तत्व प्रबल
एनीमिया में लाभ
कमजोरी दूर करता है
नहीं करना चाहिए
वेदों में उल्लेख नहीं
निष्क्रिय
पोषण नहीं देता
सुरक्षित
टिकाऊ
ऊर्जा रहित भोजन
आयुर्वेद निषेध
न्यूरोलॉजिकल प्रभाव
हड्डियाँ कमजोर
खाना पकाने से बचें
उच्च ताप पर विषाक्त गैस
हार्मोन असंतुलन
कैंसर जोखिम
पूर्ण निषेध
वेद कहते हैं:
“यदन्नं तद् मनः” अर्थात
जैसा अन्न, वैसा मन।
गलत बर्तन:
आज का विज्ञान भी मानता है कि:
धातुएँ भोजन में सूक्ष्म मात्रा में घुलती हैं
वही सूक्ष्म तत्व शरीर को प्रभावित करते हैं
आज हमने जाना कि:
हर बर्तन केवल वस्तु नहीं, ऊर्जा है
वेद और आयुर्वेद का ज्ञान आज भी वैज्ञानिक है
सही बर्तन = कम दवा, बेहतर स्वास्थ्य
अगर हम थोड़ा-सा भी प्राचीन ज्ञान को अपनाएँ,
तो रसोई ही हमारा पहला अस्पताल बन सकती है।
मैं आपसे बस इतना कहूँगा -
आज एक बर्तन बदलिए, कल शरीर धन्यवाद देगा।