आधुनिक जीवनशैली में मनुष्य का शरीर केवल भोजन से नहीं, बल्कि तनाव, प्रदूषण, अनियमित दिनचर्या, रासायनिक पदार्थों और मानसिक अशांति से भी दूषित हो रहा है। आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में आम (विषैले अवशेष) जमा हो जाते हैं, तब केवल औषधि लेने से रोग स्थायी रूप से ठीक नहीं होते।
यही कारण है कि आयुर्वेद ने “पंचकर्म” नामक एक गहन शुद्धिकरण पद्धति विकसित की, जिसका उद्देश्य
पंचकर्म केवल
उपचार नहीं, बल्कि जीवन को पुनः
प्राकृतिक अवस्था में लौटाने की प्रक्रिया
है।
दरअसल पंचकर्म दो शब्दों से मिलकर बना है-
अर्थात्
आयुर्वेद की वे पाँच मुख्य शुद्धिकरण प्रक्रियाएँ,
जिनके द्वारा शरीर में संचित दोष,
आम और विकार बाहर निकाले जाते हैं।
आचार्य चरक के अनुसार-
“रोगः दोषवैषम्यात्”
अर्थात् रोग दोषों के असंतुलन से उत्पन्न
होते हैं, और पंचकर्म
द्वारा वही दोष संतुलित किए जाते हैं।
आयुर्वेद हमारे शरीर को त्रिदोष सिद्धांत पर आधारित मानता है-
जब ये दोष अपनी
सीमा से बढ़ जाते हैं, तब पंचकर्म आवश्यक हो जाता है।
आयुर्वेद कहता है:
“दोषों को दबाओ
मत, निकालो।”
और यही पंचकर्म करता है।
वमन का अर्थ है औषधीय वमन
(उल्टी) द्वारा कफ दोष को बाहर निकालना।
वमन कब किया जाता है?
वैज्ञानिक दृष्टि:
वमन से फेफड़ों और आमाशय में जमा म्यूकस निकलता है, जिससे श्वसन तंत्र हल्का होता है।
विरेचन में औषधीय रेचक
द्रव्यों से आँतों की सफाई की जाती है।
लाभ:
वैज्ञानिक कारण:
विरेचन से यकृत (Liver) की डिटॉक्स क्षमता बढ़ती है।
बस्ती को
आयुर्वेद में “अर्धचिकित्सा”
कहा गया है।
प्रकार:
लाभ:
वैज्ञानिक आधार:
बड़ी आँत में नर्व नेटवर्क सबसे अधिक होता है, बस्ती सीधे उसी पर कार्य करती है।
नाक के माध्यम
से औषधीय तेल या रस डालना नस्य कहलाता है।
उपयोग:
“नासा हि शिरसो द्वारम्” - आयुर्वेद
रक्त में दूषित
तत्वों को निकालने की प्रक्रिया।
विधियाँ:
लाभ:
शरीर में तेल मसाज से दोषों को ढीला करता है
भाप चिकित्सा से चर्बी को पिघलाता है
ताकि शरीर नई
ऊर्जा को आत्मसात कर सके।
आधुनिक
साइकोलॉजी भी अब Gut-Brain
Axis को मान्यता दे
रही है, जिसे आयुर्वेद
हजारों वर्ष पहले जानता था।
पंचकर्म कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि बायो-डिटॉक्स सिस्टम है जो-
पंचकर्म केवल
चिकित्सा नहीं,
बल्कि स्वयं को शुद्ध करने की आध्यात्मिक-वैज्ञानिक यात्रा है।
यह शरीर को रोग-मुक्त, मन को शांत
और जीवन को संतुलित बनाता है।
आधुनिक युग में जहाँ रोग बढ़ रहे हैं, वहाँ पंचकर्म प्रकृति की ओर लौटने का मार्ग दिखाता है।
यह लेख आयुर्वेदिक ग्रंथों, पौराणिक स्रोतों तथा विभिन्न शोधपरक माध्यमों पर आधारित केवल सामान्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है।
यहां दी गई जानकारी को किसी भी प्रकार का चिकित्सकीय परामर्श या उपचार न समझें।
यदि आपको किसी प्रकार की बीमारी, स्वास्थ्य समस्या या उपचार की आवश्यकता हो, तो कृपया योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही
कोई भी उपाय अपनाएं।
इस लेख का उद्देश्य केवल ज्ञानवर्धन और जागरूकता बढ़ाना है।